जानिए सच: महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई थी ?

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान योद्धा थे जिन्होंने महल का आराम त्यागकर कष्टों से भरा जीवन चुना लेकिन अपने दुश्मन के आगे अपना सिर नहीं झुकाया।

महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई थी ?

आज हम महाराणा प्रताप के जीवन के बारे में जानेंगे। महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई थी ? महाराणा प्रताप की मृत्यु कब और कहाँ हुई थी ? इसके बारे में इस पोस्ट में आपको सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी।

सबसे पहले हम महाराणा प्रताप के जीवन के बारे जान लेते है।

परिचय

महाराणा प्रताप उत्तर-पश्चिमी भारत में मेवाड़, राजस्थान के राजपूत राजा थे। वे एक महान योद्धा थे।

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 ई. को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। इनके पिता महाराजा उदयसिंह द्वितीय और माता जयवंता बाई थीं। इसके साथ ही वह महान शासक राणा सांगा के पौत्र थे।

बचपन में उन्हें 'कीका' के नाम से भी पुकारा जाता था। दरअसल बचपन में बहुत समय तक महाराणा प्रताप भीलों के बीच रहे। उस समय भील अपने पुत्र को कीका कह कर संबोधित करते थे।

बचपन से ही महाराणा प्रताप घुड़सवारी और तलवारबाजी में कुशल थे।

अकबर ने महाराणा प्रताप को अन्य राजपूत राजाओं की तरह अपने अधीन लाने की काफी कोशिशें की, लेकिन महाराणा प्रताप ने कभी भी उनके समक्ष अपने घुटनों को नहीं टेका। महाराणा प्रताप ऐसे वीर योद्धा थे जिन्होंने कभी भी मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की और अकबर को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 को हुआ था। इस दिन हल्दीघाटी में मुग़लों की सेना और राणा प्रताप की सेना आमने-सामने थी ।

इस युद्ध में महाराणा प्रताप की छोटी सी सेना ने मुगल सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए। जब परिस्थितियां विकट हुई और मुगल सेना हावी होने लगी, तब महाराणा प्रताप युद्ध क्षेत्र से पीछे हट गए और गुरिल्ला पद्धति से अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाए रखा।

उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ जंगलों में भटकते हुए तृण-मूल व घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर किया किंतु उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया और मुग़लों के आगे घुटने नहीं टेके।

बादशाह अकबर के 30 वर्षों के लगातार प्रयास के बावजूद भी वह महाराणा प्रताप को बंदी नहीं बना सके।

महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई ?

महाराणा प्रताप की मृत्यु 29 जनवरी 1597 को चावंड में हुई। उनकी मृत्यु के समय उनकी आयु 57 वर्ष थी।

महाराणा प्रताप की मृत्यु कैसे हुई इस पर बहुत ज्यादा स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

महाराणा प्रताप की मृत्यु एक शिकार दुर्घटना में हुई। बताया जाता है कि शिकार करते समय उनकी कमान उनकी आंत में ऐसी लगी कि उससे उनके पेट में गहरा जख्म हो गया जो ठीक नहीं हो सका।

कुछ इतिहासकार ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि प्रताप की मृत्यु कोई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि वास्तव में मुगलों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या थी। मुगल प्रताप की शक्ति से डरते थे और उनसे छुटकारा पाना चाहते थे। उन्होंने उन्हें धीमी गति से काम करने वाला जहर दिया और कुछ सप्ताह बाद उसकी मृत्यु हो गई।

उनकी मृत्यु की परिस्थितियाँ चाहे जो भी हों, महाराणा प्रताप को आज भी भारतीय इतिहास के सबसे महान योद्धाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है।

महाराणा प्रताप की मृत्यु पर अकबर की प्रतिक्रिया

महाराणा प्रताप की वीरता ऐसी थी कि उनके दुश्मन भी उनके युद्ध-कौशल के कायल थे। जब अकबर ने महाराणा प्रताप की मृत्यु की खबर सुनी तब वह स्तब्ध हो गया। कहा जाता है क‍ि महाराणा प्रताप की मृत्यु पर अकबर की आंखें भी नम हो गई थीं।

महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद मेवाड़:

महाराणा प्रताप की मृत्यु मेवाड़ के लिए एक बड़ा झटका थी, लेकिन राज्य मुगलों के हाथ में नहीं आया। प्रताप के पुत्र, अमर सिंह प्रथम, उनके उत्तराधिकारी बने और मुगलों के खिलाफ लड़ते रहे। 1615 में, अमर सिंह ने मुगलों के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए जिससे मेवाड़ को स्वतंत्र रहने की अनुमति मिल गई। प्रताप की मृत्यु के बाद सदियों तक मेवाड़ पर सिसौदिया वंश का शासन रहा।

मेवाड़ में आज भी महाराणा प्रताप की विरासत का अहसास होता है। उन्हें एक महान योद्धा और राजपूत गौरव के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। उनके किले और महल लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं। उनकी कहानी गीतों, कहानियों और फिल्मों में बताई जाती है।

भारतीय इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम शौर्य और त्याग के प्रतीक के रूप में अंकित हैं। मातृभूमि के लिये उनका त्याग और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

LEAVE YOUR VALUABLE COMMENT

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post