बच्चों के समुचित विकास के लिए सिर्फ स्कूली शिक्षा जरूरी नहीं !

शिक्षा किसी भी व्यक्ति के समुचित विकास के लिए जरुरी होता हैं। हमारे जीवन मे शिक्षा का काफी महत्व हैं। इसके बिना एक बेहतर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती हैं। हमें शिक्षा प्राप्त करने के लिए बचपन से ही स्कूल भेजा जाता हैं। हर माँ-बाप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों में भेजते हैं। लेकिन क्या बच्चों के विकास के लिए सिर्फ स्कूली पढ़ाई व किताबी ज्ञान ही जरूरी है ?
स्कूलो में प्रायः बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने पर जोर दिया जाता हैं व उनकी पढ़ाई भी परीक्षा के इर्दगिर्द ही होती हैं। कई माता-पिता अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने का दवाब डालते हैं। माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों पर यह दवाब ज्यादा होता हैं। हाँ, परीक्षा में अच्छे अंक लाना जरूरी होता है लेकिन इसके लिए हमें उनपर दवाब नही डालना चाहिए। परीक्षाओं में अधिक अंक प्राप्त करना सफलता का कोई पैमाना नही हैं और न ही अधिक ज्ञान का। हमें विद्यालयों में पढ़ाई के अलावा ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहिए जिससे कि बच्चों का मानसिक, शारीरिक व सामाजिक विकास समुचित रूप से हो।
कहा गया है- अध्ययन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ, दोनों ही एक इंसान के संपूर्ण व्यक्तित्व को उभारने में सहायक होती है, क्योंकि यह दोनों ही इंसान के जीवन का एक मजबूत आधार बनाती है। आजकल कई विद्यालय इस दिशा मे सकारात्मक कदम उठा रहे हैं। विद्यालय शैक्षणिक पाठ्यक्रम के अलावा सह पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही हैं ताकि बच्चों को किताबी ज्ञान के अलावा अन्य कौशल सीखने को मिले।
सह पाठ्यक्रम गतिविधियाँ
सह पाठयक्रम गतिविधियाँ एक ऐसा पाठयक्रम है जो मुख्य पाठ्यक्रम के पूरक के रूप में काम करता है। यह पाठ्यक्रम का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है जो छात्रों के व्यक्तित्व का विकास करने के साथ ही स्कूली शिक्षा को मजबूत करने में सहायक है। इस तरह की कार्यक्रम स्कूल के नियमित समय के बाद आयोजित किया जाता है इसलिए इसे 'पाठ्येतर गतिविधियाँ' के रूप में जाना जाता है।

सह पाठयक्रम गतिविधिओं के उदाहरण
सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में मुख्य रूप से विभिन्न खेलो का आयोजन, संगीत, वाद-विवाद प्रतियोगिता, चित्रकला, नाटक,  कहानी व निबंध लेखन प्रतियोगिता शामिल हैं। इसके अलावा शिल्प, सजावट, लोकनृत्य, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, त्यौहार मनाना इत्यादि इसमे शामिल हैं।

सह पाठयक्रम गतिविधिओं के लाभ

सह पाठयक्रम गतिविधिओं के कई लाभ हैं। इसके कुछ लाभ निम्नलिखित हैं -
1. सह पाठयक्रम गतिविधियाँ खेल, अभिनय, गायन, नृत्य, निबंध लेखन, कविता पाठ इत्यादि को प्रोत्साहित करता है।
2. इसके जरिये बच्चों के रुचि को बढ़ावा मिलता हैं।
3. गतिविधियाँ जैसे खेल, वाद-विवाद में भागीदारी, संगीत, नाटक आदि शिक्षा को पूर्ण करने में मदद करता है।
4. वाद-विवाद के माध्यम से छात्र स्वतंत्र रूप से स्वयं को अभिव्यक्त कर पाता हैं।
5. खेल बच्चों को फिट और ऊर्जावान बनने में मदद करता है।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने के लिए मदद करता है।
6. यह गतिविधियाँ बताता है कि किसी भी काम को संगठित रूप में कैसे करना चाहिए, कौशल विकसित कैसे किया जाये, सहयोग और विभिन्न परिस्थितियों में समन्वय कैसे रखा जाये।
7. यह समाजीकरण, आत्म-पहचान और आत्म मूल्यांकन का अवसर प्रदान करता है।
8. इससे छात्रों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता हैं।
यह अपनेपन की भावना विकसित करने में मदद करता है।
9. इससे छात्रों में समय का समुचित प्रबंधन की क्षमता का विकास होता हैं ।

सह पाठयक्रम गतिविधिओं द्वारा छात्र व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करता हैं जो एक अच्छे जीवन जीने के लिए जरूरी होता है। बौद्धिक विकास के लिए स्कूली शिक्षा जरूरी है लेकिन शारीरिक विकास, चरित्र निर्माण, समाजिक विकास व  आध्यात्मिक विकास हेतु सिर्फ स्कूली शिक्षा जरूरी नहीं हैं।